Sunday, November 20, 2016

'साक्षी है इतिहास' तथा अन्य चार कविताएँ

1.     साक्षी है इतिहास
(मार्टिन नीमोलर को समर्पित)

जानता हूँ आप जहमत नहीं उठाएँगे
अपनी सलीब पर टँगे रहने का लुत्फ
बेग़ैरत और बेतकल्लुफ़ होकर उठाएँगे
गर उठाइगिरों की भाषा में कहूँ तो
आपके लिए आँखें बंद कर
तत्वज्ञाता बनने का मज़ा ही कुछ और है!

जगत के धृतराष्ट्रों, मैं संजय नहीं हूँ
मैं कोई रेडियो का जौकी भी नहीं हूँ
आपके दो कौड़ी के क्रिकेट का कमेंटेटर भी नहीं
इसलिए कुछ भी नहीं सुनाऊँगा

Featured Post

'साक्षी है इतिहास' तथा अन्य चार कविताएँ

1.      साक्षी है इतिहास ( मार्टिन नीमोलर को समर्पित) जानता हूँ आप जहमत नहीं उठाएँगे अपनी सलीब पर टँगे रहने का लुत्फ बेग़...