Saturday, June 28, 2014

धम्म-विजय

चाय की केतली से उठती भाप से उसे ज्ञान की प्राप्ति हुई। ज्ञान प्राप्ति के बाद उसने सेवा प्रारंभ की। सेवा से शक्ति मिली और वह मसीहा बना। पौराणिक परंपरा का अनुपालन करते हुए उसने भी स्त्री को विष की बेल स्वीकार किया। पत्नी का त्याग करने के बाद उसने आधुनिकता का परिचय देते हुए ब्रेकअप पार्टी की। उपस्थित अनुयायियों के अनुरोध पर सोमरस का पान किया। सोमरस के प्रभाव में ही उसने विधर्मियों के समूल नाश का आह्वान किया। अनुयायियों ने भक्तिभाव से उसका अनुपालन किया। जब मसीहा की चेतना लौटी तो उसे ज्ञात हुआ कि देवों में उसके इस कृत्य से आक्रोश है और सभी निंदा में व्यस्त हैं। मसीहा रुष्ट हुआ और अनुयायियों की सभा बुलाई-
मसीहा- आप सभी मेरे कृतित्व और व्यक्तित्व से परिचित हैं। आप ही बताएँ कि मैंने कुछ अनुचित किया?
अनुयायी- नहीं... कदापि नहीं। आपने तो वही किया जो अब से पहले देवतागण किया करते थे।
मसीहा- तो फिर देवताओं के आक्रोश और विरोध का कारण क्या है?
अनुयायी- केवल कुंठा..। वस्तुतः यह देवों का कार्य-क्षेत्र था, आपका कृत्य उसका अतिक्रमण है।
मसीहा- लेकिन मैंने तो धर्म-रक्षा का ही आह्वान किया था, इसमें ऐसा अप्रिय क्या था?
अनुयायी- अगर मसीहा भी देवों का कार्य करने लगे तो देवों का मूल्य कहां रह पाएगा?
मसीहा-(कुछ क्षण चिंतामग्न रहने के पश्चात)... तो अब समस्या का समाधान क्या है?
अनुयायी- नरमेध के बाद अश्वमेध की परंपरा रही है... आप अविलंब अश्वमेध यज्ञ की युक्ति करें।
मसीहा- उचित है... सर्वथा उचित। लेकिन यदि देवताओं ने पुनः आपत्ति की तो...
अनुयायी- यह भी परंपरागत ही होगा... आप चिंता न करें। देवों का दोहरा चरित्र अब गोपन नहीं रहा।
मसीहा- तो आज इस धर्म-सभा में मैं आपका मसीहा स्वयं को अहिंसक घोषित करता हूँ।
अनुयायी-(समवेत्) साधो-साधो... जय हो, जय हो... धम्म-विजय, धम्म-विजय..


मगध की जनता कालाशोक वाले युग से बहुत पहले ही मुक्त हो चुकी थी। चंडाशोक का दृश्य भी अधिक समय तक नहीं टिक सका। प्रियदर्शी को अब सभी जानते हैं। अभी से प्रस्तर मूर्तियों के निर्माण की योजनाएँ बनने लगी हैं। मसीहा ने अंगवस्त्रों का रंग परिवर्तित कर लिया है। पिपली वृक्ष के नीचे शांति है। पत्ते पीले पड़ गए हैं। देवताओं के विरोध का स्वर भी मंद पड़ने लगा है। नये अवतार को मान्यता मिलनी प्रारंभ हो गई है। मगध को अब शीघ्र ही पवित्र होना होगा। नगरवधू को आइटम सौंग के लिए आमंत्रित किया गया है। मंच सज्जा और प्रकाश व्यवस्था में अनुयायी जुटे हैं। मसीहा मृगचर्म पर ध्यान-योग में निमग्न हो गया है।

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