Friday, October 12, 2012

गुमशुदा आवाज़



साहब मैं पटना से बोल रहा हूँ। आपसे कुछ भी नहीं छुपाउंगा। बिल्कुल सच बताउंगा। मैं लव मैरिज करने के बाद अब पछता रहा हूँ। बीवी ब्लैकमेल कर रही है। उसका किसी और के साथ संबंध है। मेरे पास वीडियो फुटेज है। फोन की रिकॉर्डिंग भी है। चाहकर भी विरोध नहीं कर सकता। खुदकुशी की धमकी देती है। दहेज-प्रताड़णा का मामला बनाने और जेल भिजवाने की धमकी देती है। पुलिस को बता नहीं सकता। घरवाले पहले से ही खार खाए बैठे हैं। अंतिम उम्मीद आप ही हैं। मैं सुनता हूँ। ठीक वैसे जैसे यह रूदाद काठ के उल्लू को सुनाई जा रही हो। उसके चुप होने पर हल्ला बोल का नियत समय बतलाता हूँ। थोड़ी सी ढांढ़स देता हूँ और फोन कट।

Monday, October 1, 2012

बदले-बदले सरकार नज़र आते हैं !


बहुत शोर था तेरे सनमख़ाने में, तू शेर है, शीरीं है, शहंशाह है। जनता का हमदर्द, बड़ा हाकिम है। सुनता है उन्हें तू, देता है तसल्ली। हकीकत है या भ्रम है? सब पर्दे का करम है। एक दौर था। जब तुमसे बड़ा, तुमसे अच्छा कोई न था। अब एक दौर है। जब तुमसे बुरा कोई नहीं।

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'साक्षी है इतिहास' तथा अन्य चार कविताएँ

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